23/09/2022
" काम की बात " title पढ़ कर आप एक पल के लिए शायद से, ये सोच रहे होंगें कि कोई बहुत important काम की बात या fact लिखा होगा। है कि नहीं। अब मैं ज्यादा इधर उधर की बातें न करके । चलो मैं सीधे आपको बात के प्रकर के बारे में बताता हूँ कि
बात दो ही प्रकार की होती हैं।
एक, काम की बात और दूसरी, मन की बात।
होती दोनों बात ही हैं, लेकिन दोनों में काम की बात और मन की बात में Basic Difference होता है।
जहां काम की बात कही जा रही हो वहां पर मन की बात नहीं होती,और जहाँ मन की बात कही जा रही हो वहाँ काम की बात नहीं होती। दरअसल मन की बात, की ही इसलिए जाती है, ताकि काम की बात न करनी पड़े।
काम की बात अपने काम से काम रखती है। लेकिन मन की बात में घुंईया, अदरक, लहसुन आदि की बाते होती है। मतलब की इधर उधर की बाते। आप समझ ही गये होंगे कि मैं क्या समझाना चाह रहा हूँ। दरअसल मैं भी अपने मन की बात आपके सामने रख रहा हूँ।अब हम अपने काम और मन की बात पर आते है तो मैं कहाँ पर था। हां, मैं कह रहा रहा था कि
बात मन की हो या काम की, यदि कोई काम की बात करे और उसकी कोई न सुने, तो बेचारे की अच्छी खासी काम की बात भी मन की बात होकर रह जाती है। जबकि मन की बात को सुनने वाले मिल जाएं, तो मन की बात होने के बावजूद बड़े काम की बात बन जाती है।
है कि नहीं बताओ...
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20/09/2022
( Third-person )
जैसा कि आप सभी जानते है हमारा समाज कई वर्षों से पैतृक समाज रहा है।यहाँ पर जो आदर और सम्मान पुरुषों को दिया जाता था । वैसा ही आदर और सम्मान महिलाओं को नहीं मिलता था। लेकिन जैसे जैसे वक़्त बीतते गए । लोगो की सोच व नजरिये में भी बदलाव आने शुरू हो गए। उन्होंने महिलाओं की ताकत व शक्ति या कह लो उनकी काबिलियत को पहचाना । तो अब उनको भी समाज में वही स्थान, वही सम्मान और वही आदर मिला जहाँ पहले पुरुषों को मिलता था। लेकिन अभी भी कुछ ऐसे क्षेत्र, कस्बे या गांव है जहाँ पुरुष प्रधान की सोच बनी हुई है जहाँ सिर्फ पुरूषों को ही ज्यादा सम्मान व आदर मिलता है और जहाँ पर अभी भी महिलाओं का शोषण या दबाया या कुचला जाता है।
लेकिन हमारे समाज में एक ओर वर्ग है जिन्हें न तो पहले सम्मान व आदर मिलता था और न अब। जी हाँ, ये वर्ग है किन्नर वर्ग। जिन्हें हिजड़ा, या छक्का जैसे शब्दो का इस्तेमाल करके इनका या तो मजाक उड़ाया जाता है या इन्हें लैगिंग असमानता के आधार पर समाज से तिरस्कारा जाता है। सिर्फ लैंगिग असमानता के कारण इन्हें न तो इनके माता- पिता अपनाते है और न ही इनके परिवार वाले और न ही इनका समाज अपनाता है। जिस के कारण न तो इन्हें उचित रूप से शिक्षा मिल पाती है और न ही उचित संस्कार व पर्यावरण जहाँ ये सही से अपना जीवन का वृद्धि व विकास कर पाये...
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27/02/2022
I never faked my care to someone...
25/02/2022
How do you define your time..?
22/02/2022
What NEW did you do TODAY?
Focus on today life...
21/02/2022
Do you know when we close our eyes ?
14/02/2022
Drop ❤️ if u agree !
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06/02/2022
आज माँ सरस्वती जी का विसर्जन है और आज ही माँ सरस्वती जी के साथ ही देश की भारत रत्न पुत्री ''लता मंगेशकर जी'' हम सबको विदा करके माँ सरस्वती जी के साथ चली गई।
जिनके ऊपर माँ सरस्वती की
कृपा हमेशा रहती है
दुनियाँ उन्हें भारत कोकिला
लता मंगेशकर कहती है ।।
वेद प्रकाश वेदांत