02/11/2026
# HRMS की खामियों एवं रेल कर्मचारियों की लंबित समस्याओं के समाधान हेतु AIRF के महामंत्री कॉमरेड शिव गोपाल मिश्रा जी ने रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष एवं CEO को लिखा विस्तृत पत्र
**दिनांक: 02 नवम्बर 2026**
**प्रिय रेल साथियों,**
ऑल इंडिया रेलवेमेंस फेडरेशन (AIRF) के महामंत्री **कॉमरेड शिव गोपाल मिश्रा जी** ने भारतीय रेलवे में HRMS पोर्टल एवं CRIS Helpdesk की कार्यप्रणाली में व्याप्त तकनीकी खामियों, कर्मचारियों की सेवा संबंधी समस्याओं तथा लंबे समय से लंबित Service Requests के गंभीर मुद्दे को लेकर दिनांक 02 नवम्बर 2026 को रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष एवं CEO को एक विस्तृत पत्र लिखकर तत्काल हस्तक्षेप एवं आवश्यक सुधार की मांग की है।
HRMS को रेलवे कर्मचारियों की सेवा संबंधी प्रक्रियाओं को सरल, पारदर्शी एवं सुविधाजनक बनाने के उद्देश्य से लागू किया गया था, लेकिन वर्तमान में इसकी तकनीकी एवं कार्यप्रणाली संबंधी खामियों के कारण देशभर के रेल कर्मचारियों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
AIRF ने इस बात पर गंभीर चिंता व्यक्त की है कि बार-बार रेलवे बोर्ड के समक्ष मुद्दा उठाने तथा विभिन्न स्तरों पर शिकायतें एवं अनुरोध भेजे जाने के बावजूद अनेक वास्तविक समस्याओं का समाधान नहीं हो पा रहा है। इसके कारण कर्मचारियों को अनावश्यक मानसिक तनाव, प्रशासनिक परेशानियों एवं अपने वैध सेवा लाभ प्राप्त करने में विलंब का सामना करना पड़ रहा है।
# # # पत्र में उठाए गए प्रमुख मुद्दे एवं मांगें
**1. HRMS Service Requests का लंबे समय से लंबित रहना**
कर्मचारियों के Promotion, Seniority, Pay Fixation, Transfer, Mutual Transfer, Leave Encashment तथा Service Records में सुधार से संबंधित बड़ी संख्या में अनुरोध लंबे समय से लंबित हैं। यहां तक कि मंडल एवं जोनल मुख्यालय द्वारा जांच के बाद CRIS/HRMS Helpdesk को भेजे गए मामलों का भी निर्धारित समय में निस्तारण नहीं हो रहा है।
**2. Mutual Transfer के मामलों में गंभीर समस्या**
AIRF ने विशेष रूप से Mutual Transfer के मामलों में हो रही परेशानी को उठाया है। कुछ मामलों में Mutual Transfer की प्रक्रिया अंतिम चरण तक पहुंचने के बाद भी HRMS पोर्टल पर अचानक वापस प्रारंभिक चरण में पहुंच जाती है।
इससे कर्मचारियों को पूरी प्रक्रिया दोबारा शुरू करनी पड़ती है। Mutual Transfer के लिए आपसी सहमति, आवश्यक औपचारिकताएं एवं प्रशासनिक स्वीकृतियां प्राप्त करने में काफी समय और प्रयास लगता है। ऐसे मामलों को बिना उचित कारण एवं सूचना के प्रारंभिक चरण में वापस करना कर्मचारियों के साथ अन्यायपूर्ण है।
**3. मालदा मंडल के प्रमोशन संबंधी मामले का उल्लेख**
AIRF ने अपने पत्र में पूर्व रेलवे के मालदा मंडल के Electrical Department का विशेष उदाहरण प्रस्तुत किया है। दिसंबर 2025 में प्रकाशित MCM (TL & AC) Promotion List में पाई गई विसंगतियों को दूर करने के लिए मंडल प्रशासन द्वारा कई बार Service Requests भेजे गए तथा उन्हें HRMS Helpdesk/CRIS को विधिवत अग्रसारित भी किया गया, लेकिन इसके बावजूद अब तक आवश्यक सुधार नहीं हो पाया है।
इस प्रकार की देरी से कर्मचारियों के सेवा अभिलेखों की शुद्धता, पदोन्नति एवं उनके वैध सेवा हित प्रभावित होते हैं।
**4. CRIS एवं HRMS Helpdesk की कार्यप्रणाली की समीक्षा**
AIRF ने मांग की है कि HRMS Helpdesk/CRIS की कार्यप्रणाली की व्यापक समीक्षा की जाए। Service Requests प्राप्त करने, उनकी जांच करने, निस्तारण करने तथा लंबित मामलों की निगरानी की वर्तमान व्यवस्था का मूल्यांकन हो और अनावश्यक देरी के लिए जिम्मेदारी निर्धारित की जाए।
**5. लंबित मामलों के निपटारे हेतु विशेष अभियान**
रेलवे बोर्ड द्वारा CRIS को निर्देश दिया जाए कि भारतीय रेलवे के सभी जोनों एवं मंडलों में वर्षों से लंबित HRMS Service Requests के निस्तारण के लिए विशेष समयबद्ध अभियान चलाया जाए।
विशेष रूप से निम्नलिखित मामलों को प्राथमिकता दी जाए:
- Promotion एवं पदोन्नति संबंधी मामले।
- Seniority एवं सेवा अभिलेखों में सुधार।
- Pay Fixation एवं वेतन निर्धारण।
- Transfer एवं Mutual Transfer।
- Leave Encashment।
- अन्य सेवा संबंधी विसंगतियां एवं सुधार।
**6. प्रत्येक कार्य के लिए निश्चित समय-सीमा निर्धारित हो**
AIRF ने मांग की है कि HRMS में विभिन्न श्रेणियों के Service Requests के निस्तारण के लिए स्पष्ट समय-सीमा निर्धारित की जाए, ताकि कर्मचारियों को अपने कार्यों के लिए अनिश्चितकाल तक इंतजार न करना पड़े।
यदि कोई मामला निर्धारित समय में हल नहीं हो पाता है, तो संबंधित कर्मचारी एवं प्रशासनिक अधिकारियों को देरी का स्पष्ट कारण तथा आगे की कार्रवाई की जानकारी दी जाए।
**7. मासिक मॉनिटरिंग एवं रिपोर्टिंग की व्यवस्था**
CRIS द्वारा प्रत्येक माह रेलवे बोर्ड एवं सभी जोनल रेलवे को HRMS Service Requests के निस्तारण की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने की व्यवस्था की जाए। इसमें प्राप्त, निस्तारित एवं लंबित मामलों की संख्या, लंबित रहने की अवधि तथा देरी के कारणों का विवरण शामिल हो।
**8. शिकायतों के लिए प्रभावी Escalation Mechanism**
लंबे समय से लंबित मामलों को उच्च अधिकारियों तक पहुंचाने के लिए एक पारदर्शी एवं प्रभावी व्यवस्था बनाई जाए। निर्धारित समय-सीमा में समाधान नहीं होने पर मामला स्वतः उच्च स्तर पर भेजा जाए।
इसके साथ ही किसी Service Request को अस्वीकार करने, वापस करने अथवा बंद करने की स्थिति में उसका स्पष्ट एवं उचित कारण दर्ज करना अनिवार्य हो।
**9. HRMS की तकनीकी खामियों का स्थायी समाधान**
AIRF ने CRIS को HRMS के विभिन्न मॉड्यूल में बार-बार उत्पन्न होने वाली तकनीकी एवं कार्यप्रणाली संबंधी खामियों की पहचान कर उनका स्थायी समाधान करने की मांग की है, ताकि भविष्य में कर्मचारियों को ऐसी समस्याओं का सामना नहीं करना पड़े।
# # # AIRF ने रेलवे बोर्ड से कीं सात प्रमुख मांगें
AIRF के महामंत्री कॉमरेड शिव गोपाल मिश्रा जी ने रेलवे बोर्ड से विशेष रूप से निम्नलिखित कदम उठाने का आग्रह किया है:
1. भारतीय रेलवे के सभी लंबित HRMS Service Requests की विस्तृत एवं प्रमाणित रिपोर्ट प्राप्त की जाए।
2. CRIS/HRMS Helpdesk की कार्यप्रणाली की व्यापक समीक्षा कराई जाए।
3. लंबित मामलों के निस्तारण के लिए विशेष समयबद्ध अभियान चलाया जाए।
4. विभिन्न श्रेणियों के Service Requests के निस्तारण की निश्चित समय-सीमा निर्धारित की जाए।
5. पारदर्शी मॉनिटरिंग, रिपोर्टिंग एवं Escalation Mechanism लागू किया जाए।
6. अनावश्यक विलंब, लापरवाही एवं वास्तविक शिकायतों का समाधान नहीं करने के लिए जवाबदेही तय की जाए।
7. HRMS के तकनीकी एवं कार्यप्रणाली संबंधी दोषों को दूर करने के लिए CRIS को आवश्यक निर्देश दिए जाएं।
# # # रेल कर्मचारियों के हित में AIRF की महत्वपूर्ण पहल
**प्रिय रेल साथियों,**
AIRF का स्पष्ट मानना है कि HRMS जैसी डिजिटल व्यवस्था कर्मचारियों की सुविधा, पारदर्शिता एवं प्रशासनिक कार्यों में तेजी लाने के उद्देश्य से लागू की गई है। लेकिन यदि इसी व्यवस्था के कारण कर्मचारियों को अपने प्रमोशन, वेतन निर्धारण, स्थानांतरण, Mutual Transfer एवं अन्य सेवा संबंधी अधिकारों के लिए महीनों तक परेशान होना पड़े, तो यह व्यवस्था अपने मूल उद्देश्य से भटक जाती है।
विशेष रूप से यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि जब किसी कर्मचारी के मामले की जांच मंडल एवं जोनल मुख्यालय के सक्षम अधिकारियों द्वारा पूरी कर आवश्यक सुधार के लिए CRIS को भेज दिया जाता है, तब भी तकनीकी या प्रशासनिक कारणों से उसका निस्तारण नहीं होता। ऐसी स्थिति में कर्मचारी को होने वाली परेशानी के लिए उसे जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।
AIRF ने स्पष्ट किया है कि HRMS/CRIS की तकनीकी खामियों, सिस्टम की कमियों अथवा प्रशासनिक लापरवाही का खामियाजा किसी भी रेल कर्मचारी को नहीं भुगतना चाहिए और न ही उसे उसके वैध सेवा लाभों से वंचित रखा जाना चाहिए।
**AIRF के महामंत्री कॉमरेड शिव गोपाल मिश्रा जी द्वारा रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष एवं CEO को लिखा गया यह विस्तृत पत्र देशभर के रेल कर्मचारियों की HRMS से जुड़ी समस्याओं के समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।**
AIRF निरंतर रेल कर्मचारियों के अधिकारों, सेवा संबंधी सुविधाओं एवं न्यायसंगत मांगों के लिए संघर्षरत है। आशा है कि रेलवे बोर्ड इस गंभीर विषय पर तत्काल संज्ञान लेते हुए CRIS एवं सभी जोनल रेलवे को आवश्यक निर्देश जारी करेगा, ताकि HRMS को वास्तव में पारदर्शी, जवाबदेह एवं कर्मचारी हितैषी बनाया जा सके।
रेल कर्मचारियों के सम्मान, अधिकार एवं न्याय के लिए AIRF का संघर्ष निरंतर जारी रहेगा।
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**कॉमरेड अमित कुमार घोष जिंदाबाद!**
**कॉमरेड शिव गोपाल मिश्रा जिंदाबाद!**
**EASTERN RAILWAYMEN'S UNION (ERMU) जिंदाबाद!**
**ALL INDIA RAILWAYMEN'S FEDERATION (AIRF) जिंदाबाद!**
**रेल कर्मचारी एकता जिंदाबाद!**