12/06/2025
प्रार्थना टाइम्स
Owner email ID
Owner Mobile No. 9312256571
Owner Landline No.
RNI
Title PRARTHNA TIMES प्रार्थना टाइम्स
Regn no DELHIN/2016/68424
Language HINDI हिन्दी
Periodicity DAILY दैनिक
State DELHI दिल्ली
Publication District DELHI
Price RS. 2/-
Publisher Name GIRISH JUYAL
Publisher Address E18/1 & 19, KH NO. 135, LEFT PORTION, 3RD FLOOR, GALI NO 9, VILLAGE WAZIRABAD, DELHI-110084
Printer Name GIRISH JUYAL
Printer Address E18/1 & 19, KH NO. 135, LEFT PORTION, 3RD
12/06/2025
07/08/2016
16/07/2016
ई टी वी उर्दू के कार्यक्रम "हमारे मसाइल " पर दैनिक "पैगाम मादरे वतन " के मुख्य संपादक गिरीश जूयाल को देखें और उनके के विचारों को सुने।
06/06/2016
आतंक विरोधी युवा मोर्चा (प्रस्तावित)
गठन हेतु बैठक
हमारे देश के सुप्रसिद्ध राष्ट्रवादी संगठन ‘‘मुस्लिम राष्ट्रीय मंच’’ के तत्वाधान में दिनांक 14.05.2016 को ‘‘मुस्लिम राष्ट्रीय मंच’’ कार्यालय 606 ब्लॉक वन डीडीए फ्लॅट के कार्यालय में आतंकवाद विरोधी युवा संगठन के गठन हेतु एक बैठक आयोजित की गयी जिसमें बतौर मुख्य प्रेरक के रूप में परम आदरणीय श्री इन्द्रेश कुमार जी ने मार्गदर्शक किया उन्हीं के आहवान पर इस बैठक का आयोजन किया गया था।
उपरोक्त बैठक का मुख्य एजेन्ड़ा था कि देश में आतंकवाद के खिलाफ जनमत को एकजुट व प्रभावी बनाने में सभी प्रकार की आतंकवादी शक्तियों को नेस्तानाबूद करने के उद्देश्य से एक बहुस्तरीय व पहले कार्यरत संगठनों का परिसंघ के रूप में आतंकवादी विरोधी युवा संगठन का गठन करना।
बैठक में विभिन्न राज्यों से आये विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने इस ज्वलन्त समस्या पर विस्तारपूर्वक प्रकाश डाला व सुझाव पेश किये। अधिकांश वक्ताओं का मत था कि देश में आतंकवादियों की बढ़ती हुई गतिविधियों पर लगाम कैसे लगाई जाये और युवाओं की प्रतिभा व उनके बाढ़ रूपी क्रोध पर बांध बनाकर देश में रोशनी फैलाई जाये मुख्य अतिथि के रूप में देश के प्रसिद्ध वि`द्धान बुद्धिजीवी ‘‘मुस्लिम राष्ट्रीय मंच) के ओजिस्वी के राष्ट्रीय संरक्षक जनाब अली जनाब इन्द्रेश कुमार जी ने अपने ओजस्वी विचार व्यक्त करते हुए कहा कि आतंकवाद के नाम पर हमारे देश में युवाओं खासतौर पर मुस्लिम युवा वर्ग को बरगलाया जा रहा है और इस्लाम मजहब को बदनाम किया जा रहा है। दिशाहीन युवाओं को देश की मुख्य धारा से जोड़ना और जागरूक करना देश के सामने एक बड़ी चुनौती है पिछली सरकारों ने जिस तरह निर्दोष नवयुवकों को आतंकवाद के नाम पर जेलों की काल कोठरियों में डलवाया आज 14-15 वर्ष बाद माननीय न्यायालयों द्वारा बरी किया गया। आज भी निर्दोष युवा वर्ग जेलों में पड़े हुए है जिनको न्याय दिलाया जाये व एक आतंक विरोधी युवा मोर्चे का गठन होना नितान्त आवश्यक है। देश में अराजकता फैलाने वाली कुछ ध्वंसनात्मक शक्तियाँ चाहती है कि इस्लाम और आतंक को पर्यायवाची बना दिया जाये। यदि हमें असाधारण परिणाम प्रांप्त करना है तो हमें असाधरण प्रतिभा वाले अच्छे लोगों को तलाश करना पड़ेगा जिनके नजरियें जबरदस्त व सकारात्मक हो क्योंकि यह एक टीम वर्क है जब प्रतिभा और नजरिये पर उठते है तो टीम भी सफल होती है। हम आज इस युवाओं का आतंकवाद विरोधी मोर्चा गठित करने पर विचार विमर्श कर रहे है हमें हताशाजनक परिस्थितियों में भी अपने मनोबल को ऊँचा रख है। तब ही हमें सकारात्मक परिणाम मिलेगें और हम अपने मकसद में कामयाब रहेगें। इसलिये जीत या हार की परवाह न करते हुये हमेशा संघर्ष करने के लिए तैयार रहे। आज देश का युवा वर्ग सचेत हो चुका है। विशेषकर मुस्लिम युवा वर्ग दुनिया में दूसरे नम्बर पर मुस्लिम आबादी भारत वर्ष में है परन्तु इतने बड़े देश की इतनी बड़ी आबादी में केवल दो या तीन दर्जन लोग आई0एस0आई0एस0 के जाल में फंसे है और यह आतंकी संगठनों के मुँह पर तमाचा है और उनकी करारी हार है। इसलिये देश की अखण्डता व एकता को बचाने के लिए एक आतंक विरोधी युवा मोर्चा बनाने की अत्यन्त आवश्यकता है।
बैठक में विशिष्ट अतिथि के रूप में मादरे वतन समाचार पत्र के मुख्य सम्पादक व मुस्लिम राष्ट्रिय मंच के राष्ट्रिय संगठन संयोजक श्री गिरीश जुयाल जी ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि हम जनाब इन्द्रेश कुमार जी जो हमारे मार्गदर्शक है उनके इस प्रयास की सराहतना करते है कि उन्होनें मंथन करके अमृत रूपी विचार किया कि देश के युवाओं के आक्रोश को और अस्थिरता को समाप्त करने हेतु युवाओं का एक आतंकवादी विरोधी मोर्चा गठित किया जाये और युवाओं को कर्मवीर बनाया जाये हम उनके इस जज्बे को सलाम करते है और तन मन धन से उनके साथ है।
गिरीश जुयाल राष्ट्रीय संगठन संयोजक मुस्लिम राष्ट्रीय मंच चीफ एडिटर पैगाम मादरे वतन' उर्दू अखबार ने आतंक विरोधी नीतियों और कदमों पर विचारों का आदान प्रदान किया आतंकवाद का मूल कारण मनुष्य के मन में पल रहे स्वार्थ और लोभ जैसी पशुताएँ हैं और इनको दूर किए बिना इस विश्वव्यापी समस्या का निराकरण नहीं है। एक जनसंख्या का आर्थिक हानि,आतंकवादी हमलों में अक्सर डर और प्रचार को अधिकतम करने के लिए लक्षित कर रहे हैं। साइबर आतंकवाद, तनाव की रणनीति, राष्ट्रवादी-अलगाववादी, धार्मिक कट्टरपंथी नई धार्मिक सामाजिक क्रांतिकारी राजनीती, सामाजिक और आर्थिक असमानता, उच्च बेरोजगारी, अर्थव्यवस्थाओं ठंड, अतिवाद (Extremism) जातीय संघर्ष (Ethnic conflict) धार्मिक संघर्ष (Religious conflict) प्रादेशिक संघर्ष (Territorial conflict) ऊँचा जनसंख्या वृद्धि (population growth) दरें देश में हर रोज हजारों की संख्या में बांग्लादेशियों की घुसपैठ हो रही है, इस रोक लगना चाहिए। इससे निपटने के लिए आतंक विरोधी कानून का सख्ती से पालन हो।अलगाव (Secession) एक क्षेत्र की एक नई संप्रभु राज्य बनाने के लिए कम्युनिष्ट विचार धारा के लोग राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में रहते हैं शामिल आज जरूरत है देश में छद्म वेश में छिपे ताड़का, सुबाहु व मारीच अर्थात् आतंकवादियों को ऐसा सबक सिखाने की, जो विदेशों में बैठे लादेन, दाऊद, आई.एस.आई. रूपी रावण को समझा सकें कि भारत से वैर लेने का साहस न करें। आतंकी हमलों का न्यूज चैनल्स पर लाइव कवरेज करने से ना केवल ऑपरेशन की गोपनीयता और प्रभावशीलता पर असर पड़ता है, बल्कि सुरक्षा बलों, आम जनता और पत्रकारों को भी नुकसान हो सकता है।कुपवाड़ा और अनंतनाग में दो आतंकवाद विरोधी ऑपरेशनों के दौरान सेना को कई दिक्कतों का उस समय सामना करना पड़ा जब पत्थरबाजों ने उनके उन जवानों पर पथराव आरंभ कर दिया था, जिन्होंने 6 से अधिक आतंकियों को अपने घेरे में ले रखा था और वे उन्हें लगभग ढेर ही कर चुके थे। ‘पर पत्थरबाजों पर सयंम बरतने के कारण पिछले 4 महीनों में 30 से अधिक आतंकी इन पत्थरबाजों की ‘मेहरबानी’ के कारण अभियानों के दौरान बच निकलने में कामयाब रहे आतंक विरोधी ऑपरेशन में कामयाब नहीं हो पाए,’आतंकियों के विरुद्ध चलाए जाने वाले ऑपरेशनों के दौरान पत्थरबाजों द्वारा जवानों पर पत्थरबाजी कर आतंकियों को भागने में सहायता करने की स्थानीय लोगों की रणनीति से परेशान सेना ने अब राज्य सरकार से कहा है कि अगर वह इन पत्थरबाजों की लगाम नहीं कसती है तो वे मजबूरन इन अभियानों में शिरकत नहीं करेंगे।आतंकवाद की हर घटना के बाद दूसरों को जिम्मेवार, ठहराने, ओछी राजनीति करने, आतंकवाद से सख्ती से निपटने की औपचारिक घोषणा करने वाले भारत के राजनेता अपनी इस विरासत से मार्गदर्शन लें।आतंकवाद के कृत्यों किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए. उद्धेश्य आम जन में आतंक के प्रति जागरूकता पैदा करना पुलिस और प्रशाशन का सहयोग करना व्यपारिक संघो , धार्मिक स्थलों , मॉल्स सिनेमाघरों के पदाधिकारियों से लगातार विचार विमर्श करना और समयानुसार व आवश्यकतानुसार सुरक्षा के इन्तेजामों का जायजा लेना और सुरक्षा साधनों की व्यवस्था करना प्रमुख मार्गो व राष्ट्रीय राज मार्गो पर सीसी टीवी कैमरा का प्रयोग करना सुरक्षा सम्बन्धी एजेंसियों सेना के पदाधिकारियों , पुलिस व प्रशाशनिक अधिकारीयों के मार्ग दर्शन में समय समय पर संघोष्ठिया करना व उनके द्वारा सुझाये गए कार्यक्रमों का किर्यन्वन करना विद्यालयो एवं महाविध्यलायो के प्रधानाचार्यों के सानिध्य में विद्यार्थियों को सुरक्षा के प्रति सवेदनशील एवं जागरूक करना ग्रामीण क्षेत्रो के थानाधिकारियों तहसीलदार ग्राम प्रमुख सरपंच इत्यादि को सुरक्षा सम्बंधित जानकारी देना एवं जागरूक करना मॉल्स सिनेमाघरों एवम भीडभाड वाले क्षेत्रो में सुरक्षा के प्रति लापरवाही दिखानेवालों को समझाना और पुलिस एवं प्रशाशन को उसके बारे में अवगत करना।
बैठक को मुस्लिम राष्ट्रीय संयोजक जनाब अफजाल जी ने भी सम्बोधित किया और आदरणीय इन्द्रेश कुमार जी के इस जज्बे की सराहना की।
बैठक को राष्ट्रीय मुस्लिम स्वयं सेवक मिशन की संस्थापक अध्यक्ष श्रीमती शाहीन परवेज एडवोकेट ने भी सम्बोधित किया और कहा कि मैंने परम आदरणीय जनाब इन्द्रेश कुमार जी को बड़े ध्यानपूर्वक सुना और मैं उनके इस प्रयास और सोच की कायल हो गयी कि देश का युवा वर्ग अपने बारे में मंथन नहीं कर पा रहा। हमारे देश में परम आदरणीय इन्द्रेश कुमार जी गिरीश जुयाल जी व अफजाल जी जैसे विद्धान है जो देश के युवा वर्ग के बारे में देश की अखण्डता एकता के बारे में मंथन कर रहे है मैं इनके इस प्रयास की सराहना करती हूँ और समर्थन और समर्पण देने को तैयर हूँ और ह्नदय से चाहती हूँ कि दिशाहीन युवाओं और उर्जावान युवाओं को दिशा देने हेतु आतंकवादी विरोधी मोर्च का गठन जरूर होना चाहिये जिससे हमारा जीवन देश की सेवा में व्यतीत हो और देश के काम आये। आदरणीय इन्द्रेश कुमार जी इनसानियत के फरिश्ते की तरह काम कर रहे है सभी 1.25 करोड़ हिंदुस्तानी अपनी व देश की तरक्की में समान भागीदार बन सकें और मानवता की सेवा कर रहे है। यह एक चुनौतीपूर्वक कार्य है। हम इस प्रयास की सराहना करते है।
बैठक में उपस्थित विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने आतंकवादी विरोधी युवा मोर्चा के गठन होने पर अपने-अपने आतंक विरोधी संगठनों की आदरणीय इन्द्रेश कुमार जी द्वारा गठित मोर्चे में विलय या घटक बनने की घोषणा की।
उपरोक्त बैठक में काफी गणमान्य व्यक्ति ने भी हिस्सा लिया मुख्य रूप से फैज आलम रईस खान, डॉ नीराज (इंडिया अगेन्स्ट टेरीरिसम), गुरमीत, रफत अली, मौलाना सुहैब कासमी, डॉ इमरान चोधरी, खुर्सिद राजाका, अर्शद पोसवाल, डॉ पर्दुमन पांडे (जय भारत मंच), सम्राट, फारुख पोसवाल (जम्मू कश्मीर) एडवोकट श्रीमति शाहीन प्रवेश (मेरठ), कुमारी प्रतिभा उपस्थित रहे। बैठक को एडवोकेट यासिर जिलानी ने भी सम्बोधित किया -
बैठक में वक्ताओं की ओर से जो सुझाव लिये गये वह निम्नलिखितः-
1. राष्ट्रवादी सोच को युवाओं में जाग्रत करना तथा देश व समाज की सुरक्षा के लिए समय देने वाला बनाना।
2. युवाओं में साम्प्रदायिक वैमनस्य को समाप्त करने के प्रयास करना। सर्वपंथ संभाव को बढ़ावा देना।
3. बढ़ती बेरोजगारी ने युवाओं को दिनभ्रमित कर दिया है जिसके कारण शिक्षित बेरोजगार युवक भी आतंकवादियों से प्रभावित होकर उनके साथ आतंकी गतिविधियों में शामिल हो जाते है। देश के युवकों मे देश के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण पनपाना।
4. यह कि पिछले 67 वर्षो में आजादी के बाद से पिछली सरकारों द्वारा प्रस्ताविक विकास नहीं किया जिसके कारण युवा वर्ग अज्ञानता व पिछड़ापन के अंधेरों में भटकने लगा है। उस युवा वर्ग को भटकने से बचाना है। उसके लिये प्रयास किये जाये।
5. आतंकवाद के बढ़ने के कारणों का गहनता से अध्ययन कर उनके निराकरण का काम करना होगा।
कुछ सवालों पर हमे सोच विचार करना होगा।
1. हमें सगठन कैसे चलाना है?
2. क्या किया जा सकता है?
3. कैसे किया जा सकता है?
4. जो कुछ हम खो चुके है उसका जिक्र न करके अपने देश के निर्माण के लिये एक दृढ संकल्प करना होगा।
5. आतंकवादी गतिविधियों के विरूद्ध हम उनके सामने संगठित होकर डटे रहेगें तो उनका आत्म विश्वास डगमगा जायेगा।
6. संसाधनों का प्रबन्ध होना चाहिये।
7. देश में बढ़ती आतंकवादी गतिविधिया जम्मू-कश्मीर की वजह से निरन्तर बढ़ रही है क्योंकि सीमायें पूरी तरह सील नही है। धारा 370 की इसका एक मुख्य कारण है पाकिस्तान की तरफ से सीमाओं पर तैनात अर्द्धसैनिक बल, पुलिस और दूसरे सुरक्षा बल घुसपैठ नहीं रोक पा रहे है।
आतंकवादियों के पास आधुनिक हथियार है। उनसे मुकाबला करने के लिए क्या प्रबन्ध हो पायेगा?
हमारा पड़ोसी देश पाकिस्तान हमारे देश में अस्थिरता पैदा करता रहता है और जम्मू कश्मीर राज्य के द्वारा ही आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा देता है। 120 लाख कश्मीरी पंडित अपने ही देश में शरणार्थी बन गये।
हमारा देश सबसे ज्यादा जम्मू कश्मीर की समस्याओं से जूझ रहा है। हाफिज सईद काश्मीर में बिना किसी रोक टोक के आवागमन करता है। युवाओं को भड़काता है, हथियार और पैसा बांटता हे। आतंकवाद की ट्रेनिंग दी जाती है और भारत देश के विरूद्ध बगावत का बिगुल बजवाया जाता है।
सबसे ज्यादा जम्मू कश्मीर राज्य में युवाओं का संगठन खड़ा करने की आवश्यकता है उसके पश्चात यू0पी0 में जो आतंकवादियों की शरण स्थली बना हुआ है। को आतंक शून्य करने के लिए योजना बनाए।
यू0पी0 और जम्मू कश्मीर में आतंक विरोधी युवा मोर्चे का गठन होना अति आवश्यक है। युवा वर्ग को जब आतंकवादी संगठन अपनी ओर आकर्षिक कर लेते है तो आखिर हम लोग उनके माइण्ड वाश क्यों नहीं कर सकते। उसके लिये मनोवैज्ञानिकों का भी एक पैनल बनाया जाये जो इस मोर्चे में काम करेगें उनकी सुरक्षा का प्रबन्ध कैसे होगा।
एक राष्ट्रीय टीम संगठन में कार्यरत युवाओं पर कोई कठिनाई आने पर सहायता करे। सरकारी तंत्र की भी सहयोग की आवश्यकता पड़ेगी। बैठक के बाद उपस्थित सभी संगठन अपने-2 कार्यकर्ता की बैठक करेंगे व उनको इस बैठक के निर्णयों से अवगत कराकर शीघ्र ही पुनः उनके सुंझावों के साथ दुबारा बैठक करके इस राष्ट्र उपयोगी कार्य को लागू करेंगे।
आदिल इंद्रावी
कार्यालय प्रमुख
मुस्लिम राष्ट्रिय मंच
पूरक, कुंभक और रेचक करते समय जो मंत्र बोला जाता है, वह इस प्रकार है- ‘ओम भू: ओम भुव: ओम स्व: ओम मह: ओम जन: ओम तप: ओम सत्यम ओम तत्सवितुर्वरेण्यं भगरे देवस्य धीमहि धियो यो न: प्रचोदयात्। ओम आपो ज्योति रसोअमृतं ब्रह्म भूभरुव: स्वरोम्॥’
----------नई राह पर मुसलमान------------
वे एक तरफ नमाज पढ़ते हैं, मैं दूसरी तरफ अपना पाठ करता हूं। मुस्लिम समाज का संगठन करने के लिए न मुझे कभी मुस्लिम टोपी लगाने की जरूरत पड़ी और न ही उन्होने आग्रह किया। हाथ की कलाई पर मोटा सा कलावा (मौली) और माथे पर टीका लगाएं गिरीश जुयाल बहुत सहज भाव से यह करते हैं। वे मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के राष्ट्रीय संगठन संयोजक है। घोषित तौर पर हिंदू समाज का संगठन करने का लक्ष्य लेकर चल रहे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का यह मुस्लिम मंच है। यह संगठन मुस्लिम समाज को राष्ट्रीय सरोकारों से जोड़ने का काम करता है। संघ के पांचवें सरसंघचालक (स्व.) कूप. सी. सुदर्शन की प्रेरणा से वरिष्ठ प्रचारक इंद्रेश कुमार के मार्गदर्शन में स्थापित यह मंच कम समय में बड़ी ऊंचाई को छू गया। इसकी शुरुआत से इंद्रेश कुमार के सहयोगी के तौर पर काम करते आ रहे गिरीश जुयाल का दावा है, ‘अगर संसाधन उपलब्ध हो तो हम मुस्लिम समाज के 5 लाख लोगों का कार्यक्रम आयोजित कर सकते हैं।‘ दिल्ली में इसी तरह के कार्यक्रम की योजना पर विचार भी चल रहा है।
संघ और मुस्लिम समाज के प्रतिनिधियों के बीच संवाद के पहले भी कई दौर चले। पर संघ की और से राष्ट्रवादी मुस्लिम समाज के संगठन का विधिवत प्रयास एक दशक के कुछ पहले ही शुरू हुआ था। 14 साल के दौर में यह मुस्लिम राष्ट्रीय मंच ने कुल मिलाकर देश भर में 9335 स्थानों पर कार्यक्रम किए। इन कार्यक्रमों में सबसे उल्लेखनीय बताया जा रहा है उलेमाओं और विद्वानों का आतंकवाद के खिलाफ वजीफा यानी जप करना। आयते करीमा का वजीफा वही कर सकते हैं जो कुरान शरीफ पढ़ सकते हैं, अरबी भाषा पढ़ सकते हैं। 1851 स्थानों पर भारत पर पड़ोसी देश से आरोपित आतंकवाद के खात्मे के लिए आयतें करीमा का पाठ बड़ी बात है। बताया जा रहा है 78345 विद्वानों ने 27 करोड़ 45 लाख आयतें पढ़ी। यह संख्या हैरान करने वाली है पर गिरीश जुयाल सहजता से कहते हैं, ‘आतंक शून्य भारत के लिए सूफीयों-उलेमाओं-इस्लामी विद्वानों को ही आगे आना था। उन्हें हमने एक मंच प्रदान किया तो उसका प्रभाव भी दिखने लगा। पिछले साल लखनऊ में देशभर के उलेमाओं ने एकजुट होकर आह्वान किया कि हमारे युवा आईएसआई और आईएएसआईएएस से दूर रहें। उनके बहकावे में ना आएं। आतंकवाद को भारत और इस्लाम के खिलाफ बताया। यह बड़ी बात थी। हम दावा तो नहीं करते कि सिर्फ हम ही ऐसा कर रहे हैं। पर हम इतना जरूर कहते हैं कि मुस्लिम राष्ट्रीय मंच सभी भारतीय मुसलमानों का राष्ट्रीय स्तर का एकमात्र संगठन है।
सामान्य तौर पर माना जाता है कि मुस्लिम एक कौम के तौर पर एकजुट रहते हैं। पर सच्चाई यह है कि उनमे या तो बिरादरी के आधार पर संगठन और संस्थाए है या फिर फिरके के आधार पर। सैय्यद, अंसारी या शेफ़ी समाज की संस्थाएं हैं या फिर शिया, सुन्नी या अहले हदीस को मानने वालों के संगठन। उसी आधार पर सामाजिक-धार्मिक आयोजन होते हैं। पर कब्रिस्तानों की साफ-सफाई भी क्या इसका हिस्सा होता था। जवाब मिलेगा-नहीं। स्थानीय स्तर पर कुछ समूह अपवादस्वरुप ऐसा करते होंगे पर पिछले साल रमजान पर कब्रिस्तानों की साफ-सफाई के लिए एक अभियान ही चला। 1300 कब्रिस्तानों के भीतर और वहां तक जाने वाली सड़को-गलियों में सफाई अभियान चला। कहा जा सकता है कि यह मोदी के स्वच्छता अभियान का एक हिस्सा था। पर जुयाल कहते हैं की रमजान के दिनों में समाज आंतरिक सफाई का खास ख्याल रखते हैं।
पर अगर आस-पास गंदगी रहे तो यह क्या अच्छा लगता है। हमने आपने कार्यकर्ताओं यही बात समझाई की जेहन के साथ जहान की भी शुद्धी। सबे कदर या सबे बारात को मुस्लिम समाज अपने पूर्वजों के लिए दुआ करते हैं। हमने उसमें सिर्फ इतना और आह्वान किया कि पूर्वजों के साथ उनके लिए भी दुआ करें जिन्होंने इस देश को आजाद कराने के लिए कुर्बानी दी। यही वे छोटी-छोटी बातें हैं जिनसे भारतीय मुसलमानों को हम राष्ट्रीय स्तर पर एकजुट कर सकते हैं।
पिछले दिनों नागपुर में मुस्लिम राष्ट्रीय मंच का राष्ट्रीय अधिवेशन हुआ। इस अधिवेशन में देशभर के 175 से ज्यादा प्रतिनिधि जुटे। अधिवेशन के आखिरी दिन इन प्रतिनिधियों के साथ सैकड़ों की संख्या में स्थानीय मुसलमानों ने अलग हटकर कुछ प्रदर्शन किया। यह लोग बाबा ताजुद्दीन की दरगाह, डॉ॰ हेडगेवार-गुरुजी के स्मृति स्थल रेशिम बाग और डॉ॰ अंबेडकर की दीक्षा भूमि गए। बड़ी बात है कि इस दौरान लगाए जाने वाले नारे। नारे लग रहे थे-मादरे वतन हिंदुस्थान जिंदाबाद, वंदे भारत मातरम, भारत माता की जय और वंदे मातरम। नागपुर में इसकी खबर छाई रही राष्ट्रीय मीडिया से ओझल हो गई। यही तो वक्त था जब देश में भारत माता की जय बोलने को लेकर नकारात्मक बहस चल रही थी। भारत में इस्लाम की सबसे बड़ी कही जाने वाली संस्था दारुल उलूम, देवबंद ने भी भारत माता की जय को इस्लाम विरोधी बताने का फतवा जारी किया था। पर देवबंद के ही विद्वानों ने इससे सार्वजनिक असहमति जता दी। गिरीश जुयाल समझते हैं कि देश के 99 फीसदी मुसलमानों को भारत माता की जय बोलने में कोई हर्ज नहीं होगा। यह तो राजनीति के चलते मुद्दा बना दिया जाता है। ठीक वैसे ही जैसे नरेंद्र मोदी जी के एक मौलाना के हाथों टोपी न पहने को कांग्रेस और मीडिया ने बेवजह तूल दिया। सवाल यह नहीं है कि आप मुस्लिम जैसे दिखते हैं या नहीं, या उनकी पहचान जबरन ओढ़ते हैं या नहीं। मुद्दा यह है कि उनके लिए करते क्या हैं।
गिरीश जुयाल अपने कार्यकर्ताओं के बीच सहजता से जाते हैं। रहते-खाते हैं। उन्हें कोई अंतर नहीं महसूस होता। उर्दू लिखना-पढ़ना सीख लिया है। कुरान की आयातों से बात समझाते हैं। कहते हैं कि ‘मजहब अलग है पर समझ एक है। हमारे ग्रंथों ने कहा वसुधेव कुटुंबकम, कुरान शरीफ कहता है कुन फयकुन। यानि अल्लाह ने कहा एक हो जाओ, और हम एक हो गए। एक कुनबा हो गए। इस कुनबे को सिर्फ मुस्लिम फीरके के आधार पर नहीं, राष्ट्रीयता के स्तर पर एक हो जाना चाहिए। यही हमारी कोशिश है।‘
यह इतना आसान तो नहीं। दशकों से लोग हिंदू-मुस्लिम एकता के नारे लगाते आए। ढेरों काम किए। तब संघ से प्रेरित किसी संगठन से क्या यह व्यापक परिवर्तन आ पाएगा। मुस्लिम राष्ट्रीय मंच की सूची दूसरी है। वह ना गांधी मार्ग पर चल रहा है और ना ही सावरकर के मार्ग पर।
न इग्नोर (उपेक्षा) और न ही अपीजमेंट (तुष्टीकरण), बल्कि ट्रीटमेंट (उपचार)। मंच को लगता है कि वोट बैंक की राजनीति के चलते राष्ट्रीय सरोकारों से न जुड़ने देना ही सबसे बड़ी बीमारी है। इंद्रेश कुमार उसका ही इलाज कर रहे हैं। राष्ट्रीय सरोकारों से मुस्लिम समाज को परिचित करा रहे हैं, जोड़ रहे हैं। उनकी माने तो देश और समाज के साथ यदि मुस्लिम समाज समरस हो जाएगा तो केवल अपने सरोकारों के लिए ही आंदोलित नहीं होगा। उनकी नजर में देश प्रेम इस्लाम के लिहाज से मिनरल ईमान है। इस देश प्रेम की डोर से ही हम एक दूसरे के साथ बंध सकते हैं।
------------एक नज़र-----------
मंच ने मुस्लिम समाज की महिलाओं के बीच काम करने के लिए उन्ही के बीच से महिलाओं को प्रेरित किया, फिर जयपुर में उनका सम्मान किया।
अजमेर में पिछले साल 7500 मुस्लिम महिलाओं-युवतियों का सम्मेलन हुआ। इसमें कम खर्च पर सामूहिक विवाह और शिक्षा के लिए काम करने का अभियान शुरू किया गया।
शहीद अशफाक उल्ला खां मेमोरियल ट्रस्ट स्कूलो मे पठन सामग्री उपलब्ध कराने का काम कर रहा है।
मुस्लिम बच्चों को अच्छे स्कूलों में प्रवेश मिले, इसके लिए उनकी काउंसलिंग के कार्यक्रम।
आतंकवाद के खिलाफ युद्ध एंटी टेररिस्ट यूथ फोरम का गठन। यह वह जाएगा जहां के युवाओं के किसी भी आतंकी संगठन से जुड़ें होने की खबर हो।
रमजान के दिनों में शुचिता के लिए कब्रिस्तानों की सफाई का अभियान।
हर साल 10 मई को पहली जंगे आजादी में शहीद हुए बहादुर शाह जफर सहित सभी बलिदानी मुस्लिमों की स्मृति में समारोह
सबे बारात को पूर्वजों के साथ देश के लिए बलिदान देने वालों का स्मरण।
मुस्लिमों द्वारा संचालित 2 गौशालाओं की स्थापना। इस साल के अंत तक 10 करना। 100 से अधिक मुस्लिम कार्यकर्ताओं गौ-प्रकोष्ठ से सक्रिय।
मंच पैगाम ए मादरे वतन नाम से दैनिक उर्दू अखबार निकालता है। लगभग 30000 प्रतिदिन। इंटरनेट पर 1 लाख से अधिक पाठक।
भारतीय मुस्लिम बुद्धिजीवी मंच की एक बैठक माननीय श्री इंद्रेश कुमार जी की अध्यक्षता में हुई जिसमें निम्न परस्ताव पारित किए गए :
1. दर्जन भर के करीब मुसलमानों को माले गांव धमाके में जबरन आरोपी बनाया गया था जिन्हें भारत की न्यायपालिका ने खारिज करते हुए बाइज़्ज़त बरी कर दिया। भारतीय मुस्लिम बुद्धिजीवी मंच न्यायपालिका के इस फैसले का स्वागत करता है। न्यायपालिका के निर्णय ने एक सवाल छोड़ दिया है कि इन मुसलमानों को उस पार्टी की सरकार ने झूठा फंसाया था जिस पर मुसलमान भरोसा करते हैं, यानी कांग्रेस? मालेगांव, महाराष्ट्र में 2006 में उस समय मुस्लिम हिमायतियों की सरकार थी और केंद्र में मोदी जी भी नहीं थे। मालेगांव विस्फोट में कुछ हिन्दुओं को भी फंसाया गया था जिन्हें बाद में जांच एजेंसियों ने बरी कर दिया, अब सवाल यह है कि पहले मुसलमान फिर हिंदू आरोपी बने मगर न्याय का मंदिर उन्हें बरी करता है। इसका मतलब मुसलमानों और हिंदुओं को आपस में लड़ाने का काम तत्कालीन सरकार ही कर रही थी। कांग्रेस के शासनकाल में मुसलमानों पर मामले दर्ज हुए और भाजपा के शासनकाल में मुस्लिम बरी हुए मुसलमानों को खुले दिल से सोचना चाहिए कि उनका असली हिमायती कौन है? संघ या तथाकथित मुस्लिम समर्थक कांग्रेस?
भारतीय मुस्लिम बुद्धिजीवी मंच ने भारत में दंगों की विस्तृत समीक्षा करते हुए बताया कि आरटीआई के ज़रिए गृह मंत्रालय से मिली जानकारी के मुताबिक 1950 से लेकर प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के मरने के समय तक देश के 16 राज्यों में 243 दंगे हुए। प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के कार्यकाल में भारत के 15 राज्यों में 337 दंगे हुए। साल 1984 से लेकर मई 2012 तक देश में 26817 वारदातें हुई हैं, जिनमें कुल 12902 लोगों ने जान गंवाई हैं।1984 से 1989 राजीव गांधी देश के प्रधानमंत्री रहे। इस दौरान देश में दंगों की 4187 वारदातों हुई जिनमें 2854 लोग मारे गए।1990 में केंद्र में जनता दल की सरकार आई और वीपी सिंह देश के प्रधानमंत्री बने। साल 1990 में देश में दंगों की कुल 2593 वारदातें हुए और 1835 लोग मारे गए। 1991 में करीब 6 महीने के लिए समाजवादी पार्टी के चंद्रशेखर देश के प्रधानमंत्री रहे और इसके बाद केंद्र की सत्ता की कमान एक बार फिर से कांग्रेस के हाथों में आ गई और पी.वी. नरसिम्हा राव जून 1991 से मई 1996 तक देश के प्रधानमंत्री रहे।1991 से लेकर 1996 तक दंगों की कुल 8758 वारदातें हुई और 4774 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी। 1996 में एक बार कांग्रेस केंद्र की सत्ता से बाहर हो गई। इस साल देश में कुल 728 दंगे हुए जिनमें 209 लोगों की मौत हुई। 1996 में एक बार फिर जनता दल की सरकार आई जो मार्च 1998 तक रही। 1997 और 1998 में देश में कुल 1480 दंगे हुए जिनमें 475 लोगों की मौत हुई। साल 2004 में देश में एक बार फिर कांग्रेस की सरकार आई। साल 2004 में शुरु हुआ डॉ. मनमोहन सिंह का कार्यकाल सरकारी आंकड़ों के मुताबिक मनमोहन सिंह के अब तक आठ सालों के शासन में देश में दंगों की कुल 6086 वारदातें हुई हैं जिनमें कुल 991 लोगों ने जान गंवाई है। अब फैसला आप को करना है कि मुसलमानों का भविष्य तथाकथित सेकुलर पार्टियों के हाथों में सुरक्षित है या उस पार्टी के हाथों में जिसे आप अछूत समझते हैं।
2. भारतीय मुस्लिम बुद्धिजीवी मंच ने देश में हुए छोटे बड़े सभी घोटालों का भी समीक्षा करते हुए बताया की 1960 से लेकर अब तक घोटालों की एक लम्बी सूचि है। इन घोटालों में कितनी रकम तथाकथित सेकुलर पार्टियों के नेताओं ने हज़म करलिए, इसकी गिनती असम्भव है लेकिन एक अनुमान के अनुसार यह राशि महा संख से भी अधिक है। अगर ये रूपये देश के विकाश के लिए खर्च किये गए होते तो आज देश का हर बय्क्ति सुखी और सम्पन्य होता और हमारा देश भारत विकसित देशों की सूचि में सबसे आगे होता। अगर सच पूछिए तो आज भारत के पिछड़ेपन का ज़िम्मेदार केवल कांग्रेस पार्टी है।
3 . बिहार के मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार जी ने एक बयान में कहा था कि वह सिंह आज़ाद भारत का निर्माण करना चाहते हैं। भारतीय मुस्लिम बुद्धिजीवी मंच उनसे सवाल करना चाहता है कि क्या उन्हें पता भी है कि संघ क्या है? अगर नहीं तो वह यह जान लें कि संघ एक ऐसा संस्थान है जिसके सदस्य दुनिया भर में फैले हुए हैं, जो हर भारतीय के दिल में देशभक्ति की भावना जगाते हैं। देश के लिए मर मिटने की प्रेरणा देते हैं। , भारतीय संस्कृति और भारतीय विरासत का सम्मान करते हैं और उसका संरक्षण करने के लिए समाज को परेरित करते हैं। घर घर और गली, कूचों और मोहल्ले-मोहल्ले जाकर समाज सेवा करते हैं। समाज के हर वर्ग की समस्याओं के समाधान की कोशिश करते हैं। क्या श्री नीतीश कुमार जी भारत को संघ और स्वयंसेवकों से मुक्त करके एक ऐसे भारत का निर्माण करना चाहते हैं जिसमे कोई देशभक्ति न हो? कोई देश से प्यार करने वाला न हो। या वह यह चाहते हैं कि भारत में कोई सामाजिक संगठन न हो? क्या नीतीश कुमार जी संघ मुक्त और स्वयंसेवक मुक्त भारत बना कर भारत को पाकिस्तान या अन्य देशों से बेचना चाहते हैं? या फिर आई एस आई जैसे आतंकवादी संगठनों को सौंपना चाहते हैं? श्री नीतीश कुमार जी आप बिहार जैसे पिछड़े राज्य के मुख्यमंत्री हैं आप को आतंकवादियों और देश द्रोहियों की भाषा बोलने के बजाय बिहार के विकाश की बात सोचनी चाहिए। भारतीय मुस्लिम बुद्धिजीवी मंच मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जी को यह सलाह देना चाहता है कि वह फिर से संघ और भाजपा की शरण में आ जाएं ताकि सद्बुध्दि उन्हें प्राप्त हो और उन के अंदर भी थोड़ा देशभक्ति और मानवता का भावना पैदा हो जाए।
कैंची और सुई
यह कथा महान सूफी संत फ़रीद के बारे में है. एक बार कोई राजा फ़रीद से मिलने के लिए आया और अपने साथ उपहार में सोने की एक बहुत सुंदर कैंची लाया जिसमें हीरे जड़े हुए थे. यह कैंची बेशकीमती, अनूठी और नायाब थी. राजा ने संत के पैर छुए और उन्हें वह कैंची सौंप दी.
फ़रीद ने कैंची को एक नज़र देखा और उसे राजा के हाथ में देकर बोले, “मेरे लिए उपहार लाने के लिए मैं आपका शुक्रगुज़ार हूं. यह बहुत सुंदर है लेकिन मेरे लिए यह किसी काम की नहीं है. अच्छा होगा यदि आप मुझे इसके बदले एक सुई दे दें.”
राजा ने कहा, “मैं समझा नहीं. यदि आपको सुई की ज़रूरत है तो कैंची भी आपके काम आनी चाहिए.”
फ़रीद ने कहा, “मुझे कैंची नहीं चाहिए क्योंकि कैंची चीजों को काटती है, बांटती है, जबकि सुई चीजों का जोड़ती है. मैं प्रेम सिखाता हूं. मेरी तालीम की बुनियाद में प्रेम है – प्रेम लोगों को जोड़ता है, उन्हें बांधे रखता है. यह ऐसी सुई है जो लोगों को एक-दूसरे से जोड़ती है. कैंची मेरे लिए बेकार हैः यह काटती है… बांटती है. अगली बार आप जब आएं तो एक मामूली सुई ही लेकर आएं. मेरे लिए वही बड़ी चीज होगी.”
जय श्री सच्चिदानंद जी
01/05/2016
मुस्लिम राष्ट्रीय मंच अच्छे चरित्र के साथ जिंदगी बिताने वाला इंसान बनाने की तहरीर (पहल) है. इसी पहल को 1400 वर्ष पहले पैगंबर साहब (स.) ने बिना घबराए चलाया था. हमें पैगंबर साहब की उसी पहल को बिनाए घबराए चलाना है.मालिक को निर्मलता, पवित्रता और सर्मपण बहुत पसंद है. संकट के समय भी हमें मालिक पर भरोसा रहना चाहिए. बुरी स्थिति में न घबराते हुए चुनौतियों का सामना करना चाहिए. राष्ट्रीय मुस्लिम मंच का बढ़ता प्रभाव इस पहल की मजबूती को बखूबी पेश कर रहा है.
मुस्लिम राष्ट्रीय मंच चार मुद्दों को लेकर काम कर रहा हैं. इसमें अनाज बैंक का संचालन, सबको तालीम, तिरंगा फहराने को लेकर जागृति और धर्मान्तरण और दंगों को पूर्णतः नकारना. कोई भूखा न सोए इसलिए देश में 12 अनाज बैंक खोलने का मंच का मानस हैं. सबको तालीम उपलब्ध करने के लिए शहीद अशफाक उल्लाह मेमोरियल ट्रस्ट कार्यरत है. इसके माध्यम से 20 हजार बच्चों को कापी, पेन और यूनिफार्म वितरित किए गए हैं. आनेवाले दिनों में 100 बच्चों को वजीफा दिलाने का प्रयास किया जाएगा.मंच पर श्री इन्द्रेश जी के साथ श्री गिरीश जुयाल,डॉ. इमरान चौधरी ,सुरेन्द्र कुमार,एडवोकेट यासिर जिलानी ने दिल्ली के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि दिल्ली में 1 करोड़ आयत-ए-करीमा पढ़ी गई. यह कार्यक्रम महबूब इलाही व् निजामुद्दीन जैसे दरगाहों में बटला हॉउस, सुकमार जिले में हुए. चार स्थानों के कार्यक्रम जी टीवी, ईटीवी, IBN7 जैसे चैनलों ने दिखाए. इस कार्यक्रमों में 1075 लोग शामिल हुए थे.
गणतंत्र दिवस पर 22 जगहों पर तिरंगा फहराया गया. इसमें 500 विद्यार्थी शामिल हुए थे. हजरत निजामुद्दीन दर्हाग के सामने झंडा फहराया गया जिसमें 200 लोग मौजूद थे.
18 फरवरी को दो तन अनाज कबूतरों को खिलाया गया. खटिया शाह, मटका शाह, और निजामुद्दीन की दरगाह पर चादर चढ़ाई गई. बटला में सभा का अस्योजन किया गया जिसमें 250 संख्या थी. बाटला में ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ कार्यक्रम किया गया जिसमें श्री इन्द्रेश कुमार जी उपस्थित थे.
हरियाणा से खुर्शीद राजाका ने कहा कि आयत-ए-करीमा के कार्यक्रम 10 जिलों में 50 मस्जिद और 10 मदरसों में हुए, जिसमें कुल 30 लाख पाठ किया गया. 26 जनवरी को 12 मदरसों में झंडा फहराया गया. 22 फरवरी को ‘सद्भावना दिवस’ मनाया गया. 8 मार्च को महिला दिवस, 21 मार्च को कौमी एकता दिवस मनाया गया. यमुना नगर में रक्तदान कैंप लगाया गया
कहते हैं कि सिकंदरिया की महान लाइब्रेरी में जब भीषण आग लग गयी तब केवल एक ही किताब आग से बच पाई। वह कोई महत्वपूर्ण या मूल्यवान किताब नहीं थी। मामूली पढ़ना जानने वाले एक गरीब आदमी ने वह किताब चंद पैसों में खरीद ली।
किताब में कुछ खास रोचक नहीं था। लेकिन किताब के भीतर आदमी को एक पर्ची पर कुछ अजीब चीज़ लिखी मिली। उस पर्ची पर पारस पत्थर का रहस्य लिखा हुआ था।
पर्ची पर लिखा था कि पारस पत्थर एक छोटा सा कंकड़ था जो साधारण धातुओं को सोने में बदल सकता था। पर्ची के अनुसार वह कंकड़ उस जैसे दिखनेवाले हजारों दूसरे कंकडों के साथ एक सागरतट पर पड़ा हुआ था। कंकड़ की पहचान यह थी कि दूसरे कंकडों की तुलना में वह थोड़ा गरम प्रतीत होता जबकि साधारण कंकड़ ठंडे प्रतीत होते।
उस आदमी ने अपनी सारी वस्तुएं बेच दीं और पारस पत्थर ढूँढने के लिए ज़रूरी सामान लेकर समुद्र की ओर चल पड़ा।
वह जानता था कि यदि वह साधारण कंकडों को उठा-उठा कर देखता रहा तो वह एक ही कंकड़ को शायद कई बार उठा लेगा। इसमें तो बहुत सारा समय भी नष्ट हो जाता। इसीलिए वह कंकड़ को उठाकर उसकी ठंडक या गर्माहट देखकर उसे समुद्र में फेंक देता था।
दिन हफ्तों में बदले और हफ्ते महीनों में। वह कंकड़ उठा-उठा कर उन्हें समुद्र में फेंकता गया। एक दिन दोपहर में उसने एक कंकड़ उठाया – वह गरम था। लेकिन इससे पहले कि आदमी कुछ सोचता, आदत से मजबूर होकर उसने उसे समुद्र में फेंक दिया। समुद्र में उसे फेंकते ही उसे यह भान हुआ कि उसने कितनी बड़ी गलती कर दी है। इतने लंबे समय तक प्रतिदिन हजारों कंकडों को उठाकर समुद्र में फेंकते रहने की मजबूत आदत होने के कारण उसने उस कंकड़ को भी समुद्र में फेंक दिया जिसकी तलाश में उसने अपना सब कुछ छोड़ दिया था।
ऐसा ही कुछ हम लोग अपने सामने मौजूद अवसरों के साथ करते हैं। सामने खड़े अवसर को पहचानने में एक पल की चूक ही उसे हमसे बहुत दूर कर देती है।
Click here to claim your Sponsored Listing.
Location
Telephone
Website
Address
E18/1 & 19, KH NO. 135, LEFT PORTION, 3RD FLOOR, GALI NO 9, VILLAGE
Delhi
110084
Opening Hours
| Monday | 9am - 5pm |
| Tuesday | 9am - 5pm |
| Wednesday | 9am - 5pm |
| Thursday | 9am - 5pm |
| Friday | 9am - 5pm |
| Saturday | 9am - 5pm |