ये ये चकाचौंध, ये रोशनी की दुनिया
नहीं है मेरे लिए
ये सौदेबाजी की दुनिया
जहां दिल है खाली
ये सौदेबाजी की दुनिया
जहां दिल है खाली
खोखले है बातें
झूठी सारी शर्ते
बेनामी चेहरे
उजाले में अंधेरे
ये चकाचौंध, ये रोशनी की दुनिया
नहीं है मेरे लिए।
निधि
Dil se dil tak
friendship is better then love.............
नौ रस" या "नव रस" एक हिंदी मुहावरा है जो कि नौ प्रकार के रसों को दर्शाता है। इस मुहावरे का उपयोग आम तौर पर एक व्यक्ति की विभिन्न भावनाओं या अनुभवों को व्यक्त करने के लिए किया जाता है।
नौ रस-
श्रृंगार रस (भावनात्मक संतुष्टि)
हास्य रस (विनोद का अनुभव)
वीर रस (साहसिकता एवं शौर्य का अनुभव)
शांत रस (शांति अनुभव)
विभत्स रस (घृणा एवं निंदा का अनुभव)
रौद्र रस (क्रोध का अनुभव)
भयानक रस (भय का अनुभव)
विराट रस (उल्लास या भयानकता का अनुभव)
आद्भुत रस (आश्चर्य का अनुभव)
निधि मिथिल भंडारे
THE BEAUTY OF DEATH
Death, the great unknown,
A destination we all must face alone.
No matter how hard we try,
Inevitably, our time will come to die.
For some, it comes with a warning,
While others depart without a mourning.
But no matter the way in which we go,
Our spirits will forever glow.
The memories we leave behind,
The legacy that we define,
Will live on long after we're gone,
In the hearts of those we shone.
Death is not an end, but a new beginning,
A chance for our souls to start spinning,
Into a world that we cannot see,
A place where our spirits can roam free.
So let us not fear the end,
For it is just around the bend,
And instead, let us embrace the fate we cannot change,
And live our lives with purpose, meaning, and range.
Nidhi Mithil Bhandare
AGE WITH GRACE
Age with grace, oh gentle soul,
Let your wisdom shine and your spirit whole,
Embrace the journey of growing old,
With a heart full of love and a mind so bold.
Let every wrinkle be a sign of time,
A life well-lived, full of joy and rhyme,
Let your eyes sparkle with memories sweet,
And your smile be a reflection of a heart complete.
Let your steps be slow but sure,
As you walk the path that’s paved before,
May every moment be a precious gift,
And every breath be a reminder to lift.
Your spirit high, to soar above,
The cares and worries of this life we love,
May you find peace in the golden years,
And grace in the face of all your fears.
So age with grace, oh precious one,
Your journey’s not done, it’s just begun,
May your heart and soul forever be,
A shining light for all to see.
Nidhi Mithil Bhandare
प्रारब्ध
"प्रारब्ध" एक व्यक्ति के जीवन में उन कर्मों को दर्शाता है जो उन्होंने पूर्व जन्म में किए थे और उनके इस जन्म में फल उन्हें मिल रहे हैं। यह उन विशिष्ट कर्मों का समूह होता है जो जीवन की आयु के दौरान उन्हें फल प्रदान करते हैं।
दार्शनिक रूप से, "प्रारब्ध" एक धार्मिक अवधारणा है जो कहती है कि हमारा वर्तमान जीवन हमारे पूर्व कर्मों के फलों का परिणाम है। इस अवधारणा के अनुसार, हमारी आज की स्थिति हमारे अपने कर्मों के फल के आधार पर निर्मित होती है और हम भविष्य में अपने कर्मों के अनुसार फलों का अनुभव अवश्य करेंगे।
निधि मिथिल भंडारे
सात्विकता
सात्विक होना जीवन में बहुत जरूरी होती है। यह हमारे व्यक्तिगत विकास, समाज के विकास और समस्त मानवता के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
सात्विकता होने में हमारी मनस्थिति सकारात्मक होती है और हम शुद्ध चित्त वाले बन जाते । यह हमें एक स्वस्थ और सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने में मदद करती है। सात्विक मानसिक स्थिति में हम विचारों, भावनाओं और क्रियाओं की शुद्धता और शक्ति का अनुभव करते हैं।
सात्विकता से हमें बेहतर निर्णय लेने में मदद मिलती है। इससे हम अपनी सोच और व्यवहार में सकारात्मक परिवर्तन लाते हैं जो हमें बेहतर लोग बनने में आसानी होती है।
सात्विकता से हम संयम, समझौता, सहानुभूति और धैर्य जैसी गुणों को विकसित कर सकते हैं जो हमारे संबंधों को अधिक संयंत्रित व विश्वसनीय बनने में मदद करते हैं ।
समस्त धर्मों में सात्विकता का महत्व बताया गया है।
निधि मिथिल भंडारे
आदर्श बनने के लिए आपको अपने जीवन में एक उच्च स्तर का शिखर प्राप्त करना होगा। आदर्श बनने के लिए आपको निम्नलिखित चरणों का पालन करना होगा:
स्वयं का विकास: आपको स्वयं का विकास करना होगा। आपको अपनी क्षमताओं को बढ़ाना, नए ज्ञान को अर्जित करना, नए कौशल विकसित करना, स्वस्थ रहना, आत्मविश्वास बढ़ाना और स्वयं के बारे में ज्ञान प्राप्त करना आवश्यक होगा।
अनुशासन: आदर्श बनने के लिए अनुशासन बहुत जरूरी होता है। आपको समय पर काम करना, नियमों का पालन करना और स्वयं को संयमित रखना चाहिए।
संवेदनशीलता: आदर्श व्यक्ति संवेदनशील होते हैं और दूसरों के भावों को समझते हैं। आपको दूसरों की मदद करने, संवेदनशील और समझदार बनने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
नैतिकता: आदर्श व्यक्ति नैतिक होते हैं और ईमानदारी से काम करते हैं। आपको अपने आप पर विश्वास करना चाहिए और हमेशा सत्य का समर्थन करना चाहिए।
निधि मिथील भंडारे
चुप रहना भी एक कला होती है,
मौन से भी कई बातें कही जाती हैं।
कुछ अभिव्यक्ति के लिए शब्दोें की जरूरत नहीं होती,
कुछ बातों के लिए चुप्पी ही श्रेष्ठ होती है।
कुछ बातें होती हैं जो समझने के लिए शब्दों की जगह नहीं,
मौन से भी उन्हें समझा जा सकता है।
मौन की शक्ति अद्भुत होती है,
बिना कुछ कहे भी कई बातें होती हैं
जब मन शांत होता है, तब मौन का अर्थ समझ में आता है,
जब मन अस्थिर होता है, तब शब्दों से भी कुछ नहीं मिलता है।
चुप रहना भी एक कला होती है
मौन के द्वारा हम सभी बातें समझ सकते हैं,
मौन हमें स्वयं को भी समझाता है अंतर की बातें।
इसलिए जीवन में कुछ समय मौन का भी समय होना चाहिए
मौन भी एक कला होती है
मौन से भी कई बातें कही जाती हैं।
निधि मिथिल भंडारे
बदल जाए मौसमों सा
फिर वो इंसान कैसा
नियत ना हो पाक अगर
फिर वो इंसान कैसा
बहुत चाहा मैं भी बदल जाऊं
गिरकर एक बार संभाल जाऊं
फिर सोचा
जवाब देना है उसको
जिसने बनाया मुझे मुझ जैसा
चोट लगे, दर्द मिले, रास्ते में बहुत भुलावे मिले
पर न सोचा बुरा
ना किया बुरा
बस लगा जब
अपना रास्ता बदल दिया
हे भगवान, बस इतना करम रखना
निधि को जैसा बनाया आपने
वैसा ही रखना
कौन अमर हो पाया है यहां
सबको जाना है एक दिन उस जहां
नजरे मिला पाऊं आपसे
जब मिलूं एक दिन,
बस इतना ही करम रखना
मुझे ऐसे ही संभाले रखना🙏
निधि मिथील भंडारे
अजनबी कोई जब अपना लगे
सदियों का नाता हो
ऐसा लगे
कुछ तुम सुनो
कुछ तुम कहो
सच नही होता है हर लम्हा
हर लम्हे में छुपी
बस एक वो
कहानी सी लगे।
निधि
अजीब सा दौर है
अजीब सी रिवायतें
अजीब से हैं रिश्ते
अजीब सी दरार
भागते सभी यहां
ना जाने किस मंजिल की ओर
अजीब से सवाल के
अजीब से जवाब
अजीब से अहसास लिए
मिलते है लोग
अजीब सी सोच है
अजीब सी है डोर
जुड़ी है पर गांठ पड़ी
ना जाने किस ओर
ये दुनिया है खड़ी,
अजीब है ये दुनिया
अजीब किस्म के लोग
चल निधि कहीं और चलें
जहां मिले कुछ ऐसे लोग
आत्मा संग आत्मा मिले
जहां हो सबकी एक सी सोच
जहां निस्वार्थ, प्रेममय हो लोग
चल निधि चल वहां चले
जहां हो सबकी अच्छी सोच।
निधि मिथिल भंडारे
किसी को समझाना हो
किसी को समझना हो
किसी को अपनाना हो
किसी से जुदा होना हो
बड़ा मुश्किल होता है
किसी को जब कुछ जताना हो
ऐसा संगदिल तो नहीं मेरा दिल
झूठ पर जब सच का परदा डालना हो
बड़ा मुश्किल है इस दौर में
जब पत्थर दिल पर रखकर
हर रिश्ता निभाना हो।
निधि मिथिल भंडारे
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